सफ़ेद कपड़े पहने दो व्यक्ति झेलम नदी में घुटनों से ऊपर तक पानी में खड़े हुए हैं. उनके चेहरे लाल रंग से पुते हैं और वे कीचड़ में सने हुए हैं. एक व्यक्ति ने पगड़ी पकड़ी हुई है, जिसका आधा हिस्सा कीचड़ में सना हुआ है और आधा पानी में. एक आदमी पानी में डूबा हुआ है. उसका सिर्फ़ माथा ही दिखाई दे रहा है, जो पानी की सतह से थोड़ा ऊपर है और उसके सिर पर रखी पगड़ी पर एक पंख लगा हुआ है. उसके सामने पानी में तैरता हुआ एक कागज़ का टुकड़ा है, जिस पर लाल रंग लगा हुआ है, जो ख़ून जैसा दिख रहा है.
खाली पड़े खनन स्थल पर बादलों के नीचे गहरे लाल रंग की पोशाक पहने, जिसे कश्मीरी फेरन कहा जाता है, एक व्यक्ति बाहें फैलाए खड़ा है. उसकी पीठ और आस्तीन पर सफ़ेद रंग से ‘पीएसए’ और ‘आफसपा’ लिखा हुए हैं. उसके बगल में लाल स्याही में डूबा हुआ एक सफ़ेद कपड़ा है. उसकी बाहों के पीछे मिट्टी का एक टीला है जो एक छोटी पहाड़ी जैसा है. कलाकार और टीले के चारों ओर कॉन्सर्टिना तार दिखाई दे रहा है. तार उसके बालों और फेरन में उलझा हुआ है और उसके शरीर से लिपटा हुआ है. कश्मीर में बुज़ुर्ग महिलाओं द्वारा सिर पर पहना जाने वाला दुपट्टा जिसे ख़ासा रहा जाता है, भी तार में फंसा हुआ है.